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Rain and Dead Poets Society

इस गरजते बादल की बरसती बूँदो के परे कहीं,
हम तेरी भीगी यादों को अपना बना लेते!
जो देखा होता तेरी आँखों के परे कहीं
तो हम भी चाँद सितारों की दो-चार बातें बना लेते।

At 1am,A little poem inside, little more rain outside and #DeadPoetsSociety make a perfect night!!

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वोट

लोग ना जाने क्या क्या कह के वोट माँग लेते हैं …
हम तो आईने में देख के खुद को भी वोट नहीं दे पाते हैं ..!!

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भूख

सो गये बच्चे ग़रीब के ये सुनकर,
की फरिश्ते आते हैं ख्वाब मे रोटियाँ लेकर…

एक रोटी ना दे सका कोई उस नादान को,
लेकिन वो तस्वीर लाखों मे बिक गयी जिसमे वो भूखा बैठा था….!!

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देश क्या है?

देश क्या है…………
नेहरू, पटेल, गांधी की कहानी है?
मोदी, केजरीवाल, सोनिया की जुबानी है?
बाढ़ में रोते बाप की पुकार है, या,
आकाल में सोते बच्चे की हार है?

देश क्या है…………
बलात्कार से सहमी लड़कियों की चीख़ है?
मंदिर, मस्ज़िद, गुरूद्वारे में बँट रही भीख़ है?
लद्दाख में ठिठुरता जवान है, या,
कश्मीर मांगता हुआ हिन्दू – मुस्लमान है?

देश क्या है…………
सिनेमा में तालियां बजाने वाली मासूमियत है?
किताबों में बेची गई झूठी हक़ीक़त है?
जन गण मन पर झूमता हुआ जन समूह है, या,
व्यवस्था में कुचली गयी बेबस रूह है?

जिसे १५ अगस्त, २६ जनवरी
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का नाम पता है
वही देश है, या
रिक्सा वाला, जो नहीं जानता भगत कौन थें
बोस कौन थें, पटेल कौन थें
वह भी देश है?

Train में मूँगफली फेंककर
अमरीका की सफ़ाई पर चर्चा करना देश है?
सब कुछ देखकर आँखें बंद कर लेना देश है?
अपने परिवार का पेट पालना देश है, या,
देश पर बैठकर घंटो विचार करना देश है?

देश तुम हो, देश मैं हूँ, देश हम हैं
देश परिभाषाओं की जागीर नहीं,
देश इंसानियत सँभालने का ढाँचा है…

शायद!

#RepublicDay

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